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Wednesday, May 17, 2017

Akhbar.. Newspaper..again

बस्ती में आग की कभी ख़बर पढ़ा करते थे,
अख़बार तो अब पूरा शहर जला देता है।
#KashWrites

Friday, April 21, 2017

Ajab

अजब सी नाइंसाफी है ख़ुदाया,
इंसान पैदा बस एक बार होता है,
तो वो मरता क्यों बार बार है?!!?!

Sunday, April 09, 2017

Akhbar

आज फ़िर कोई ईमान बिका है,
आज फ़िर एक रूह मिटी है,
आज फ़िर अख़बार छपा है।

आज फ़िर एक ज़मीर लुटा है,
आज फ़िर हमाम सजा है,
आज फ़िर अख़बार छपा है।

आज फ़िर इल्ज़ाम लगा है,
आज फ़िर झूठ ऊगा है,
आज फ़िर अख़बार छपा है।

#KashWrites

Monday, July 27, 2015

Ye Dilli.....

मुद्दतों से देश की राजधानी दिल्ली,
शाहों के बद्इरादों में कुचली ये दिल्ली,
रिश्तों के पीठ में खंजरों की भीड़ दिल्ली,
मुर्दों पे खड़े हसीन मीनारों की दिल्ली,
सदियों के इतिहास को रौंद नई तारीख़ दिल्ली,
हमाम को बनाये हरम ये नंगी दिल्ली,
बेग़मो से निज़ाद पाते ही दिल्ली,
हुई फ़िर ग़ुलाम--केजरी दिल्ली,
तेरी क़िस्मत पे रोऊँ या हँसूँ दिल्ली,
ये शान ये तवारीख़ तुझे मुबारक़ दिल्ली।

July 24 2015

Kirdaar

ख़ुद से मिलूँ कभी तो पूछूँगा,कौन हूँ मैं,
उम्र तो सारी कट गई बस क़िरदार निभाते निभाते।

July 21 2015