बस्ती में आग की कभी ख़बर पढ़ा करते थे,
अख़बार तो अब पूरा शहर जला देता है।
#KashWrites
Kashyap Shah....an individual out of the billions on this planet..his life, his thoughts, his inspirations, his happiness, his pains...."then" and "now"
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Wednesday, May 17, 2017
Akhbar.. Newspaper..again
Friday, April 21, 2017
Sunday, April 09, 2017
Akhbar
आज फ़िर कोई ईमान बिका है,
आज फ़िर एक रूह मिटी है,
आज फ़िर अख़बार छपा है।
आज फ़िर एक ज़मीर लुटा है,
आज फ़िर हमाम सजा है,
आज फ़िर अख़बार छपा है।
आज फ़िर इल्ज़ाम लगा है,
आज फ़िर झूठ ऊगा है,
आज फ़िर अख़बार छपा है।
#KashWrites
Monday, July 27, 2015
Ye Dilli.....
मुद्दतों से देश की राजधानी दिल्ली,
शाहों के बद्इरादों में कुचली ये दिल्ली,
रिश्तों के पीठ में खंजरों की भीड़ दिल्ली,
मुर्दों पे खड़े हसीन मीनारों की दिल्ली,
सदियों के इतिहास को रौंद नई तारीख़ दिल्ली,
हमाम को बनाये हरम ये नंगी दिल्ली,
बेग़मो से निज़ाद पाते ही दिल्ली,
हुई फ़िर ग़ुलाम-ए-केजरी दिल्ली,
तेरी क़िस्मत पे रोऊँ या हँसूँ ए दिल्ली,
ये शान ये तवारीख़ तुझे मुबारक़ दिल्ली।
July 24 2015
शाहों के बद्इरादों में कुचली ये दिल्ली,
रिश्तों के पीठ में खंजरों की भीड़ दिल्ली,
मुर्दों पे खड़े हसीन मीनारों की दिल्ली,
सदियों के इतिहास को रौंद नई तारीख़ दिल्ली,
हमाम को बनाये हरम ये नंगी दिल्ली,
बेग़मो से निज़ाद पाते ही दिल्ली,
हुई फ़िर ग़ुलाम-ए-केजरी दिल्ली,
तेरी क़िस्मत पे रोऊँ या हँसूँ ए दिल्ली,
ये शान ये तवारीख़ तुझे मुबारक़ दिल्ली।
July 24 2015
Kirdaar
ख़ुद से मिलूँ कभी तो पूछूँगा,कौन हूँ मैं,
उम्र तो सारी कट गई बस क़िरदार निभाते निभाते।
July 21 2015
उम्र तो सारी कट गई बस क़िरदार निभाते निभाते।
July 21 2015
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