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Friday, November 15, 2019

khwab... ख़्वाब

अपने ही ख्वाबों में क़ैद हूँ कूछ इस कदर,
नींद में भी ख़्वाब नसीब नहीं होते आज कल ।
#KashWrites 11/14/2019 

Daudti hui zindagi..

दो ही मंज़र दिखते हैं अब तो,
फोन के स्क्रीन में ठहरा हुआ बचपन,
और रास्तों पर...
उम्र से तेज़ दौड़ती ज़िन्दगी।
#KashWrites

28 June 2019

Monday, July 03, 2017

बरसात rain


आज मैं निकल पड़ा हूँ,
कुछ सपने संजोने,
कुछ ख़्वाब बेचने,
कुछ यादें भिगोने,
कुछ लम्हें मिटाने,
क़तरे समेटने,
कुछ वादे बेचने...
...आज बरसात हुई है,
आज फ़िर निकल पड़ा हूँ।