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Wednesday, May 17, 2017

Akhbar.. Newspaper..again

बस्ती में आग की कभी ख़बर पढ़ा करते थे,
अख़बार तो अब पूरा शहर जला देता है।
#KashWrites

Sunday, April 09, 2017

Akhbar

आज फ़िर कोई ईमान बिका है,
आज फ़िर एक रूह मिटी है,
आज फ़िर अख़बार छपा है।

आज फ़िर एक ज़मीर लुटा है,
आज फ़िर हमाम सजा है,
आज फ़िर अख़बार छपा है।

आज फ़िर इल्ज़ाम लगा है,
आज फ़िर झूठ ऊगा है,
आज फ़िर अख़बार छपा है।

#KashWrites

Wednesday, April 20, 2016

Akhbar....Newspapers...

अख़बारों का भी अजीब सा मामला है,
जो सच्चा है वो बिकता नहीं और जो बिका हुआ है बहुत बिकता है।